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मैं Priya हूँ… कभी किसी को सिर्फ इसलिए छोड़ा था क्योंकि वो मेरी देह चाहता था। क्योंकि वो बार-बार मेरी आँखों में देखता और कहता — "तू मेरी है Priya, तेरी चूत भी मेरी है।" और मैं डर जाती थी… सोचती थी ये सिर्फ मुझे पाने के लिए है, प्यार नहीं करता।
पर अब… सब कुछ बदल चुका है। Rajeev ने मुझे वो सब सिखा दिया जो मैं खुद से भी छुपाती थी। अब मुझे sex से डर नहीं लगता… अब मुझे उसकी चाहत है। अब मेरी चूत प्यास से जलती है, और मैं उसे बुझाना जानती हूँ।
उसी प्यास में मैंने Aakash को मैसेज किया — वही लड़का जिसे मैंने सिर्फ इसलिए छोड़ा था क्योंकि वो मेरी चूत को छूना चाहता था। आज उसी को मैं खुद अपनी देह सौंपना चाहती थी। मैंने लिखा — "अब भी मेरी याद आती है?" उसने तुरंत जवाब दिया — "तू अब भी मेरी सबसे गंदी और सबसे हसीन चाहत है।"
मैंने लिखा — "अगर आज मैं आऊँ तेरे पास, खुद से, तैयार होकर… तब भी वैसे ही करेगा मेरे साथ जैसा तेरा मन करता था?"
उसने लिखा — "तेरी चूत चूसते-चूसते तुझे रुला दूँगा Priya… तू खुद बोलेगी — और कर Aakash, और… छोड़ मत मुझे।"
बस, उस मैसेज के बाद मेरे तन में जैसे बिजली दौड़ गई। मैंने mirror selfie खींची, कंधा और cleavage दिखाते हुए — और भेज दिया उसे। लिखा — "तैयार रह, आज तेरी अधूरी चूत खुद चलकर आ रही है।"
शाम को मैं उसके घर पहुँची। मैंने दरवाज़ा खोला और वो सामने खड़ा था — आँखों में भूख, लंड में उबाल। उसने बिना कुछ कहे मुझे दीवार से सटा दिया, होंठों को चूस लिया — और मैं उसकी बाँहों में ऐसे समा गई जैसे मैं उसी के लिए बनी हूँ।
"तू खुद आ गई? तू अब ready है Priya?" मैंने उसकी शर्ट की कॉलर पकड़ी — "अब डर नहीं लगता Aakash… अब मेरी चूत खुद लंड माँगती है… और आज तुझे सब दूँगी… सब कुछ, जिसकी तुझे कभी भूख थी।"
उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर तक ले गया। मेरे कपड़े उसके हाथों में खुद ही उतरते गए… मेरी ब्रा फेंकी, मेरे निप्पल उसने मुँह में ले लिए — और मैं सिसक उठी। मेरी टाँगें काँप रहीं थीं, लेकिन मैं खुद उसे खींच रही थी…
मैंने उसका लंड पहली बार ठीक से देखा — मोटा, गर्म, और तना हुआ। मैंने उसे हाथ में लिया, अपनी ज़ुबान से चाटा… और फिर उसे मुँह में भर लिया — पूरा… गले तक। Aakash की कराह सुनकर मेरी चूत और भी गीली हो गई। मैंने उसे चूसा — धीरे-धीरे, फिर तेज़… जैसे उसे पिघलाकर पी जाना चाहती हूँ।
वो अब और नहीं सह पाया — उसने मुझे उल्टा किया, और मेरी चूत में एक झटके में लंड घुसा दिया। "Priya… अब तू मेरी है… पूरी तरह।" मैं चीख पड़ी — "आहhh... Aakash... मेरी चूत... तू तो फाड़ देगा मुझे…" पर मैं रुकना नहीं चाहती थी। मैंने खुद अपनी कमर उसकी ओर झोंक दी। "हाँ Aakash… भर दे मुझे… मेरी चूत तेरी ही थी… तेरी ही है… तेरी ही रहेगी…"
अब वो मुझे उठा-उठाकर चोद रहा था… हर झटके में मेरी छाती हिल रही थी, मेरी चूत भर चुकी थी लेकिन उसकी भूख रुकी नहीं। मेरे होठों से चीखें निकल रही थीं — तेज़, रुक-रुक कर… जैसे orgasm में बसी हुई सिसकियाँ। मैं काँप रही थी… मेरे नाखून उसकी पीठ में धँस चुके थे… और मैं… मैं अपनी पहली झड़ में डूब रही थी… पूरी देह थरथरा रही थी।
मेरी चूत ने उसके लंड को कस कर भींच लिया… और मैं orgasm में बिखर गई… पूरी तरह… सिसकते हुए। लेकिन Aakash रुका नहीं… शायद उसने कोई गोली ले रखी थी… अब उसकी आँखों में और भी वहशीपन था।
उसने मुझे पलटा, मेरे बाल पकड़कर मुझे घुटनों के बल कर दिया — और पीछे से दोबारा घुसा गया। "अब तो झड़ गई न Priya? पर अब तू मेरी रफ्तार से नहीं बच पाएगी।" उसका लंड और गहरा जा रहा था… मेरी चीखें अब रुक नहीं रही थीं — "Aaaaah Aakash… तू मुझे मार देगा… मेरी चूत जल रही है… भर गई है… आहहह…!!"
लेकिन मेरी चूत अब खुद उसे खींच रही थी… मैं बार-बार झड़ रही थी… हर बार उसकी रग-रग को महसूस करते हुए… उसकी जकड़… उसका वहशीपन… सब मेरे अंदर उतर चुका था। कभी मुँह में डालता, कभी फिर से चूत में… कभी मुझे अपने ऊपर चढ़ाता, कभी मेरी टाँगें अपने कंधों तक उठा देता। कभी missionary, कभी doggy, कभी side में टेढ़ा करके… पूरी रात वो मेरी चूत से खेलता रहा। हर बार जब मैं झड़ती, वो रुकने की बजाय और गहरा भरता… मेरी हालत खराब हो चुकी थी।
मेरे होंठ सूख चुके थे, आँखें उलट रही थीं, और मेरी चूत लगातार फड़क रही थी। Aakash बार-बार झुककर मेरे मुँह में ठोक देता, फिर दोबारा भरता चूत… मानो उसे मेरी रूह तक चाट लेनी हो। मेरे शरीर पर उसके लंड के निशान थे… हर बार झड़ने के बाद मैं सुन्न हो जाती, लेकिन वो फिर मुझे सीधा करके नई पोजिशन में घुसा देता। वो बदला ले रहा था — उन सालों का, जब मैंने उसे सिर्फ इसलिए छोड़ा था क्योंकि वो मेरी देह चाहता था। आज मैं खुद उसकी देह बन चुकी थी… और वो पूरी रात नहीं रुका।
जब सब खत्म हुआ… मैं उसकी छाती पर लेटी थी, थकी हुई… काँपती हुई… गीली और टूटी हुई। लेकिन अब डर के नहीं — मज़े के। मेरी चूत जल रही थी… लेकिन तृप्त थी।
अब मैं वो औरत थी जिसकी चूत बोल चुकी थी — “मुझे चाहिए… और चाहिए… और फिर चाहिए…”
और अब मुझे समझ आ गया था… मेरे पास दो चीज़ें थीं — Aakash, जो मेरी चूत की प्यास बुझाता रहेगा… जब-जब मैं बुलाऊँ… और Rajeev — जो मेरी ज़िंदगी में पैसे की कमी नहीं आने देगा। और कभी-कभी, उसकी चाह में वो भी मेरी चूत का स्वाद चख ही लेगा…