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मैं राघव हूँ… उम्र 30 की, लेकिन आज तक कभी किसी लड़की को छू तक नहीं पाया। ना स्कूल में, ना कॉलेज में, ना पहली तीन नौकरियों में।
जहाँ बाकी दोस्त अपनी sex stories सुनाते — “भाई, उस पार्टी में उसने खुद unzip कर दिया था…” — मैं बस अपनी chai में शक्कर घोलता रहता। कभी connection नहीं बना, कभी कोई लड़की करीब नहीं आई… बस time बीतता गया, लंड और तन्हा होता गया।
Emotional bond, flirting, signals — सब मेरे लिए किसी और दुनिया की चीजें थीं। कभी लगा शायद problem मुझमें ही है… या फिर मेरी किस्मत किसी चमत्कार का इंतज़ार कर रही है।
फिर एक दिन अंदर से कुछ टूटा — और मैंने खुद से कहा — **“अब नहीं, भाई… अब मुझे चाहिए — प्यार नहीं तो कम से कम एक बार की तृप्ति।”**
मैंने अपना सामान समेटा और shift कर लिया — **Gurgaon**। Corporate world — जहाँ कहा जाता था *“affairs तो file folder की तरह चलते हैं, बस खोलना आना चाहिए।”*
Apply किया, और DLF Phase 2 की एक MNC में software developer की job लग गई।
पहले ही दिन lobby में receptionist — घुटनों तक slit वाली skirt, खुले बाल और गुलाबी lipstick — मुस्कराकर बोली, *“Welcome Mr. Raghav.”* मेरे लंड ने धीरे से गर्दन उठाई — *“शुरुआत अच्छी है।”*
Lift में मिली मेरी टीम लीड — Tanya — headphones, laptop bag, और sleeveless top में छलकती सफेदी। एक नज़र में professional, और दूसरी में **unreachable fantasy**।
पहले हफ्ते मैं चुप रहा — खुद को observe करता, office के माहौल में घुलने की कोशिश करता रहा।
तीसरे दिन Tanya खुद पास आई — “Lunch किया?” मैंने कहा, “अभी नहीं…” वो मुस्कराई — “चलो coffee लेते हैं, bored हो जाओगे अकेले बैठ के…”
Break area में उसने मेरी आँखों में देखा — **“You don’t talk much, hmm?”** मैंने कहा — “शायद आदत नहीं… लड़कियों से बात करने की।” वो हँसी — “तो यहीं से शुरू करते हैं…”
उसके बाद कुछ बदलने लगा — अब वो दिन में random messages भेजती — *“Lunch में साथ आओ…”* *“आज boring है, मेरी desk पे बैठो।”*
मेरी screen से ज़्यादा ध्यान अब उसकी हँसी पर टिकता… उसके perfume पर, उसके fingernail polish के shades पर।
और फिर एक दिन उसने casually कहा — “Weekend पे मेरी society में pool party है… अकेले जाने का मन नहीं है, तुम चलो ना मेरे साथ?”
Bro… मेरा दिल नहीं, मेरा लंड धड़कने लगा था। 30 साल की सूखी आत्मा को Gurgaon की हवा ने सींचना शुरू कर दिया था।
Pool party वाली रात थी… Tanya ने हल्की wine पी रखी थी। music धीमा हो चुका था… और लोग धीरे-धीरे निकल चुके थे।
मैं pool के पास एक recliner पे बैठा था… तभी Tanya पास आई — हाथ में अपना last glass पकड़े हुए — और मेरे बगल में बैठ गई।
उसके गीले बाल खुले थे, और उसकी shoulders से bikini strap थोड़ी ढीली सी लटक रही थी। वो मेरे कंधे पर हल्के से झुकी और मुस्कराकर बोली — “You’re too sweet Raghav… मुझे लगा था तुम boring type हो… but you’re kind of a hidden treasure…”
उसकी साँसें wine से भी ज़्यादा intoxicating लग रही थीं। उसकी उंगलियाँ मेरी हथेली से खेलने लगीं — धीरे-धीरे tracing करती हुई।
“Tanya…” मैंने कुछ कहने की कोशिश की। उसने मेरी आँखों में देखा — **“Shhh… कुछ मत बोलो… बस feel करो।”**
वो मेरे बिल्कुल करीब आ चुकी थी… एक पल को लगा जैसे kiss करेगी — लेकिन फिर उसने अपनी आँखें बंद कीं, माथा मेरे सीने से टिका लिया।
कुछ देर हम वैसे ही बैठे रहे — बिना बोले। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि शायद उसने भी सुनी होगी।
Party खत्म हो चुकी थी… सब जा चुके थे। Tanya ने धीरे से मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी — “थोड़ी देर और… मेरे फ्लैट चलो?”
मैं Tanya के पीछे खामोशी से चला जा रहा था… लेकिन अंदर एक तूफान था। मेरा लंड हल्की हवा से भी हिल रहा था… क्योंकि मुझे Tanya की आँखों और चाल से साफ दिख रहा था — **आज कुछ होने वाला है।**
जब उसने मेरा हाथ पकड़ा — तो वो सिर्फ नशे में नहीं थी… **वो जानती थी क्या करने जा रही है।** उसकी उंगलियाँ थमी नहीं… उन्होंने पकड़ के hint दे दिया था — **“चलो मेरे साथ… आज तुझे चखूँगी।”**
उसका फ्लैट खुला… और मेरी आँखें थोड़ी देर के लिए अटक गईं। कमरा आधा अंधेरे में था… बस एक warm light की हल्की-सी आभा, जिसमें उसकी गीली ज़ुल्फ़ें और wine की खुशबू दोनों एक साथ मुझे पागल बना रही थीं।
वो मुड़ी, और मुस्कुरा कर बोली — “Relax करो… कोई scene नहीं है। बस तुम्हें देखना अच्छा लग रहा है।” लेकिन उसके होंठ की कोनों में हल्की सी शरारत थी — जैसे वो पहले से तय करके आई हो कि आज ये लड़का उसका होगा।
वो धीमे-धीमे चलती हुई सोफे तक पहुँची, robe ढीला था… और चलते वक्त उसकी जाँघें दिख रही थीं — **गोरी, चिकनी… और हल्की रौशनी में चमकती हुई।**
वो बैठते हुए थोड़ा और खुल गई — उसका robe का ऊपरी हिस्सा नीचे सरक गया था, अब cleavage साफ दिख रहा था… और मेरी नज़र वहीं अटक गई।
मेरे लंड ने खुद से हल्की हरकत ली — pant के अंदर वो धीरे-धीरे उठने लगा था… मैंने खुद को ज़ोर से रोका कि कहीं हाथ न चला जाए वहीं खड़े-खड़े।
तभी Tanya ने मेरी तरफ देखा — जैसे मेरे मन की हालत पढ़ ली हो। उसने हाथ बढ़ाया… “आओ पास… डर क्यों रहे हो?”
उसकी आवाज़ में नशा था… लेकिन आँखों में full control। वो cute लग रही थी, लेकिन उस cuteness के पीछे एक **चूसी हुई planning** थी। वो जानती थी — लड़के कैसे टूटते हैं… और मैं अब उसकी चाल में फँस चुका था।
मैं उसके पास गया… और मेरे लंड की धड़कन अब तेज़ थी — जैसे किसी ने अंदर से कहा हो: **“भाई आज फटेगा… ये लड़की खेलने नहीं, चूसने बुला रही है।”**
मैं उसके और करीब गया… उसने मुस्कुराते हुए मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। उसकी उंगलियाँ मेरी छाती पर चल रही थीं जैसे वो मुझे पढ़ रही हो — “आज कुछ मत बोलना Raghav… बस चुप रहो… और मुझे महसूस होने दो।”
उसकी आँखें नशे में थीं… लेकिन उनमें कोई धुंध नहीं थी। वो चाहती थी — मुझे, पूरे होश में, पूरे होश उड़ाकर। उसने मेरी ऊँगली अपने होंठों पर रखी — “शब्द नहीं… धड़कनों से बात करो। मुझे सिर्फ धड़कते हुए देखो।”
फिर उसने धीरे से मेरी pant की चेन खोली। लंड उसके सामने खड़ा था — throbbing, eager, और बिल्कुल नंगा। उसने उसे हल्के से पकड़ा, नज़रों में झाँकते हुए बोली — “तू तो पहले से तैयार बैठा है… कितनी देर से मेरा इंतज़ार कर रहा था, है ना?”
वो नीचे झुकी, लंड को चूमा… फिर धीरे से अपनी जीभ से हल्की रेखा बनाई, जैसे स्वाद ले रही हो। उसने आँखें बंद कीं, और फुसफुसाई — “पहली बार taste कर रही हूँ किसी का… और ये पहली बार हमेशा याद रहेगा।”
वो मुँह में लेने लगी — धीरे-धीरे… सिर हिलाती, जीभ घुमाती, उसकी थूक लंड को गीला कर रही थी। मैंने उसका सिर थाम लिया… उसने हल्के से खुद को छुड़ाया और देखा — “तेरा हाथ नहीं चलेगा… आज सिर्फ मैं तय करूँगी कि तुझे कितना मज़ा मिलेगा।”
उसने खुद को खोल दिया — robe एक झटके में ज़मीन पर था। नग्न बदन पर उसका चेहरा लाल हो रहा था — नशा, चाहत, और हक की लाली। “अब तुझे अंदर लेना है… लेकिन धीरे… क्योंकि मैं आज हर सेंटीमीटर महसूस करना चाहती हूँ।”
वो मेरी गोद में चढ़ गई — लंड को पकड़कर अपनी गीली चूत पर रखा — और फिर नीचे धंसती चली गई… पूरा अंदर।
“उह्ह्ह… हाँ…” उसके होंठ काँपे, पीठ झुक गई, आँखें अपने आप बंद हो गईं। “It fits… just like it was made for me… मेरी चूत ने तुझे पहचान लिया है।”
उसने हिलना शुरू किया — ऊपर-नीचे… धीरे-धीरे… उसकी हर थ्रस्ट में लहर थी, गर्मी थी, नमी थी। हर बार जब वो नीचे आती, मेरी जांघों से आवाज़ होती — “छप… छप… और गहरी… हाँ…”
वो मेरी छाती पर झुकी, मेरी गर्दन को चूमा और बोली — “तेरा लंड… मेरी चूत के बिना अधूरा है… और मैं तुझे अधूरा नहीं रहने दूंगी।”
जब मेरा शरीर कांपने लगा… वो और ज़ोर से हिलने लगी… उसने मेरी कमर कस कर जकड़ ली, दोनों टाँगों से जकड़ते हुए बोली — “अंदर छोड़… पूरा… मैं तेरी हूँ… मेरी चूत सिर्फ तुझे चाहिए…”
मैंने सब कुछ उसके अंदर छोड़ दिया — गरम, भारी… और तृप्त। वो हिली… थरथराई… फिर मेरे सीने पर गिर पड़ी।
उसने मेरे सीने पर चेहरा टिकाया, उंगलियाँ मेरी छाती पर चलाते हुए धीमे से बोली — “अब तुम सिर्फ मेरे हो Raghav… कभी भी किसी और की तरफ देखा ना, तो मेरा दिल टूट जाएगा… और जब भी मेरी चूत तुम्हें चाहे — तुम्हें आना होगा… बिना पूछे, बिना सोचे… बस मेरा बनकर।”
उसकी बात सुनकर मैं कुछ पल के लिए बिलकुल चुप रह गया। उसकी आवाज़ अभी भी मेरे कानों में गूंज रही थी — “अब तुम सिर्फ मेरे हो… जब भी मेरी चूत तुम्हें चाहे, आना होगा…”
दिल अंदर से पिघल गया… उसकी ये possessive बात कोई धमकी नहीं लगी — ये एक addiction जैसा था… जैसे मेरी रूह उसकी बन चुकी थी, और मैं अब खुद को उसे सौंप चुका था।
लेकिन अंदर कहीं एक और reaction हो रहा था — **मेरा लंड, जो अभी ही उसके अंदर से निकला था, फिर से तड़प उठा।** जैसे Tanya की हर लाइन उसके लिए पुकार हो। जैसे वो सुनते ही बोल उठा हो — “मुझे फिर से उसके अंदर जाना है… उसकी चूत फिर से मेरी आग बुझा सकती है…”
मैंने उसकी कमर में हाथ डाला, और हल्के से अपने पास खींच लिया। उसकी साँसें अभी भी गर्म थीं, उसके होठ अभी भी नम। और मेरे अंदर एक ही बात चल रही थी — “Tanya… अब तू सिर्फ मेरी नहीं रही… मैं भी तेरा हो गया हूँ — दिल से, लंड से, पूरी जान से।”
मैं Tanya की टाँगों के बीच बैठा, कुछ सेकंड के लिए चुप। और पहली बार — बिना किसी कपड़े, बिना किसी रोक के — एक औरत की चूत को सामने से देख रहा था।
उसकी चूत अब भी खुली पड़ी थी — अभी-अभी जिस लंड ने अंदर झाड़ा था, **उसी का गर्म गाढ़ा वीर्य अब उसके होठों से बाहर रिस रहा था।** सफेद, थूक जैसा… चूत के रस में मिला हुआ — धीरे-धीरे जाँघ तक आ रहा था।
मैं झुका — “ये मेरा है…” मैंने जीभ निकाली… और चूत से बहता हुआ सारा वीर्य चाट लिया। **चूत का नमक, लंड का गरम वीर्य — दोनों का स्वाद एक साथ।** मैंने एक बार में सब पी लिया — “अब ये तुझे भी चखाना है…”
मैंने उसके होंठ पकड़े… और उसे चूमा। गहरा, जबरदस्त किस — “Taste कर… ये तेरी चूत का रस और मेरे लंड का झाड़ा मिला है।”
मैं Tanya के ऊपर झुका… उसने मेरी गर्दन में हाथ डाले और मेरे होंठों को पकड़ लिया। हमने एक लंबा, गीला, गरम लिप-किस किया — **धीरे-धीरे जीभें आपस में उलझने लगीं… जैसे हम दोनों का स्वाद मिल रहा हो।**
उसके होंठ मेरे होंठों पे थरथरा रहे थे — वो मेरी जीभ चूस रही थी — जैसे अभी-अभी उसे मेरी वीर्य की याद बाकी हो। “Mmmm… Raghav… अब मुझे चाट मत… चूस मुझे पूरी तरह…”
मैंने उसके गाल, फिर ठोड़ी और फिर गर्दन को चूमना शुरू किया — धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए — उसके कॉलरबोन पे जीभ फिराई, और फिर उसके चूचियों तक पहुँचा। नरम, भारी, और थरथराते हुए — “ये सब भी मेरा है…” — मैंने मन ही मन कहा, और दोनों निपल्स को बारी-बारी मुँह में लिया।
वो अब हल्की-हल्की हाँफ रही थी — उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ में उतर चुकी थीं। “Raghav… तू चोदने से पहले मुझे जिंदा कर रहा है…”
मैं फिर नीचे गया — उसकी टाँगों के बीच… चादर उसके नीचे भीग चुकी थी। उसकी चूत अब पूरी खुली पड़ी थी — अभी-अभी जिस लंड ने वीर्य फेंका था, उसी का गाढ़ा माल अब भी बह रहा था।
मैंने पहले देखा — फिर चूमा। फिर जीभ से ऊपर से नीचे एक लंबी लाइन चाटी। **वो गरम वीर्य और चूत के रस का मिलाजुला स्वाद — मेरी जीभ पर अब तक का सबसे सच्चा स्वाद था।**
मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को फैलाया — भीतर तक देखा — और फिर गहराई में जीभ डाल दी। “Raghav… तू चोदने नहीं… चाटने के लिए पैदा हुआ है क्या?”
वो हँसी और काँपी भी — उसके पैर अब मेरी गर्दन पे कस चुके थे, जैसे कह रही हो — “अब भाग मत जाना।”
अब मेरा लंड गरम हो चुका था — **पूरा भरा हुआ, नसों से उफनता हुआ।** मैंने उसे पकड़ा — चूत के होठों पर टिका दिया। Tanya ने आँखें बंद कीं — “Ahhh… धीरे… लेकिन आज सब मेरा बना दे…”
मैंने कमर झुकाई — **और एक धीमे मगर गहरे धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।** अब हम दोनों की साँसें एक जैसी हो गईं — भारी, टूटती, और लिपटी हुई।
मैंने लंड को सीधा अंदर धंसा दिया — धीरे… पूरा… उसकी भीगी चूत के हर किनारे को भरते हुए। **वो तड़प उठी — उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ में धँस गईं… और मेरी तसल्ली वहीं से शुरू हुई।**
मैंने अपनी पूरी नजर उसकी चूत पर टिका दी — और एक हलके झटके में **लंड की मोटी टिप उसके अंदर धंसा दी।** उसके मुँह से सिसकी निकली — “Raghav… तेरा लंड… इतना मोटा… अह्ह…”
मैं रुका नहीं… धीरे-धीरे, पूरा लंड उसकी चूत में उतारता चला गया। **हर इंच उसके अंदर धँसता जा रहा था — और वो अंदर से कसती जा रही थी।** मेरे लंड को उसकी भीगी गर्मी अंदर तक खींच रही थी।
जब पूरा लंड अंदर चला गया — उसका पूरा बदन हल्का सा कांप गया। उसने टाँगें मेरी कमर के चारों ओर कस दीं, और खुद को मुझसे चिपका लिया — “उह्ह… पूरा घुस गया… बस रुको… हिलना मत प्लीज़… अभी सह नहीं पा रही… …”
मैंने उसका माथा चूमा, लेकिन अब रुकना मुमकिन नहीं था। लंड उसकी चूत के अंदर पूरा धंसा हुआ था — और वो हल्की-हल्की थरथरा रही थी, जैसे हर पल उसे और चाहिए।
मेरी कमर खुद-ब-खुद हिलने लगी — धीरे बाहर निकाला, फिर पूरा अंदर धंसा दिया। **छप… छप… छप…** हर झटके में उसकी चूत मेरी लंड को भींच रही थी, जैसे छोड़ना ही ना चाहती हो।
वो अब हाँफ रही थी — आँखें आधी बंद, होंठ खुले, और मुँह से सिर्फ टूटी-फूटी आहें — “उह्ह… राघव… और दे… और अंदर तक ले जा…”
मैंने उसकी टाँगें ऊपर उठाईं — अब हर धक्का सीधा अंदर लग रहा था। उसका बदन बिस्तर पर उछल रहा था — उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ में खुद रही थीं।
मैंने चूचियाँ मुंह में लीं — “तेरा लंड… मेरी चूत को तोड़ देगा राघव… लेकिन रुकना मत…”
अब मैं रुकने की हालत में नहीं था — तेज़ी से अंदर-बाहर करता गया — बिस्तर हिल रहा था, उसकी चूत से आवाजें आ रहीं थीं — **छप… छप… छप…**
वो कांपने लगी — उसने मेरी कमर पकड़ी और कहा — “अब छोड़ अंदर… पूरा फोड़ दे… मेरा सब भर दे…”
मैंने एक आखिरी जोरदार झटका मारा — **पूरा लंड उसकी चूत में धँसाया और वहीं सारा गरम लावा छोड़ दिया।** वो चीखी, काँपी… फिर ढीली पड़कर मेरी छाती पर गिर गई।
हम दोनों की साँसें अब भी टूटी हुई थीं — उसका बदन मेरी बाहों में हल्का-हल्का काँप रहा था। मेरे लंड से निकला सारा गरम बोझ अब उसकी चूत के अंदर उतर चुका था।
मैंने उसकी गर्दन के पास झुककर धीरे से कहा — “आज से तू मेरी है… और तेरी चूत अब बस मेरा नाम बोलेगी।”
वो हँसी — थकी हुई, भीगी हुई — और खुद को मेरे सीने में और ज़ोर से छुपा लिया।
मैंने एक लंबी साँस ली — और मन में बस एक ही बात थी — “30 साल का सूखा लंड… आज पहली बार किसी की चूत में खोया था”
और बस… यही थी मेरी कहानी — कैसे 30 साल से सूखा फिरता मेरा वर्जिन लंड Tanya की चूत में उतरकर मर्द बना। हां, रास्ते में और भी चूतें मिलीं — Shreya की नज़रों में ललक थी, Aarti की तन्हाई में जगह थी… लेकिन एक सच समझ आया — हर चूत के पीछे भागना मर्दानगी नहीं… क्योंकि जब Tanya जैसी चूत मिल जाती है — तो फिर और कुछ चाहिए ही नहीं। अब मेरा लंड सिर्फ उसी का है — और उसी की गीली, कसती, बोलती हुई चूत में जीना है।